
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास जी 08 अगस्त को कहा था कि भारतीय रिजर्व बैंक देश मे कारोबार को आसान बनाने के लिए बैंक चेक आवश्यक समाशोधन कर दो दिन से घटाकर कुछ घंटों का समय करने का प्रयास कर रहा है। अभी वर्तमान मे चेक टंकेशण सिस्टम से चेक समाशोधन बैच प्रोसेसिंग मोड मे संचालित होता है। इसमे दो कार्यदिवस का समय लगता है। शक्तिकांत दास जी ने कहा कि सीटीएस मे आम रियलाइजेशन सेटलमेंट के साथ निरंतर समाशोधन शुरू करके समाशोधन चक्र को कम करने का प्रस्ताव है। रिजर्व बैंक के प्रमुख ने कहा कि इसका मतलब है कि चेक प्रस्तुत किये जाने के दिन ही कुछ ही घंटों मे चेक क्लियर हो सकता है। इससे चेक द्वारा भुगतान मे तेजी आयेगी। भुगतानकर्ता तथा प्राप्तकर्ता दोनो को ही इससे फायदा मिलेगा। चेक ट्रंकेशन मे चेक जारी करने वाले व्यक्ति द्वारा जारी किये गये भौतिक चेक को प्रस्तुतकर्ता बैंक से भुगतानकर्ता बैंक तक के शाखा मे स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया शामिल है। भौतिक चेक भेजने के जगह पर चेक की इलेक्ट्रॉनिक काॅपी क्लियरिंग हायस के द्वारा भुगतानकर्त शाखा को प्रेषित की जाती है। जो एमआईसीआर बैक प्रस्तुति की तिथि एवं प्रस्तुतकर्ता बैंक जैसी जानकारी बताती है। इस प्रकार चेक ट्रंकेशण से बैंक शाखाओ के मध्य भौतिक उपकरणों को ले जाने की आवश्यकता भी खत्म हो जाती है। सीटीएस ग्राहकों को पारंपरिक तुलना मे धन की त्वरित तथा सस्ती प्राप्ती मे सक्षम बनाता है। यदि संग्रह कर्ता बैंक और भुगतानकर्ता बैंक एक ही सिटीएस ग्रिड के अधिकार क्षेत्र मे स्थित है तो कोई बाहरी चेक पर संग्रह शुल्क भी नही लगाया जायेगा। भले ही वह अलग अलग शहरों मे स्थित हो।




